Make Money Online

Covid-19 के दौरान हैकिंग की महामारी! साइबर क्रिमिनल्स के झांसे में फंसे करीब 75 फीसद लोग: रिपोर्ट


नई दिल्ली। हम कोविड-19 महामारी के तीसरे वर्ष में एंट्री प्रवेश कर रहे हैं। भारत में इंटरनेट के इस्तेमाल पर बात की जाए तो इस पर हम सभी की निर्भरता बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है लेकिन ऑनलाइन हैकिंग या धोखाधड़ी इतनी ज्यादा बढ़ गई है यह सिक्योरिटी को लेकर बड़ी चिंता है लगातार बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर डाटा की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए जाते हैं फिर भी हैकर्स अपने काम को अंजाम देने में सक्षम होते हैं।

बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी/एटीएम फ्रॉड, फेक न्यूज और ऑनलाइन फ्रॉड में काफी वृद्धि देखने को मिली है। भारत में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) अपराध 2020, सितंबर 2021 में जारी VOL II, भारत में साइबर क्राइम के 50,035 मामले दर्ज किए गए, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साइबर क्राइम्स की दर भी 2019 में 3.3 से बढ़कर 2020 में 3.7 हो गई। हाल ही में OLX धोखाधड़ी सर्वे में इस बात की खुलासा किया गया है। OLX इनिसिएटिव के फोर्थ वर्जन, OLX 2022 सुरक्षित इंटरनेट डे अध्ययन से पता चला है कि सभी रिस्पॉन्डेंट्स में से 1/3 से ज्यादा लोग महामारी के दौरान कम से कम एक बार ऑनलाइन हैकिंग का शिकार जरूर हुए हैं। मेन एक्टिविटी की बात करें तो यह ऑनलाइन खरीदारी के दौरान ज्यादा हुए हैं। इनमें से 36 फीसद लोग इंटरनेट पर सेफ महसूस नहीं करते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया (20%) का इस्तेमाल होता है। 50 और उससे अधिक आयु वर्ग में, ऑनलाइन कंटेंट की खपत में 5 में से 1 रिस्पॉन्डेंट्स (19%) सेफ महसूस नहीं करते हैं।

महामारी के दौरान, 5 में से 3 रिस्पॉन्डेंट्स का मानना है कि महामारी के दौरान उनकी ऑनलाइन सेफ्टी अवेयरनेस बढ़ी है। 50 वर्ष और उससे ज्यादा आयु वालों में, 3 में से 2 रिस्पॉन्डेंट्स ने खुद को इस मामले में बेहतर किया है।

इसी तरह, पासवर्ड सेफ्टी की बात करें तो पासवर्ड को लगातार बदलते रहना और विभिन्न ऑनलाइन सर्विसेज और प्लेटफार्मों पर अलग-अलग पासवर्ड रखना सभी रिस्पॉन्डेंट्स (43%) के बीच एक पसंदीदा विकल्प बनकर उभरा है।

ज्यादातर रिस्पॉन्डेंट्स के लिए, पिछले एक वर्ष में इंटरनेट का इस्तेमाल 50% से ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि ऑनलाइन सर्विसेज को एक्सेस करने की फ्रीक्वेंसी में वृद्धि हुई है। यह अध्ययन भारत के शीर्ष मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में 20 और उससे ज्यादा आयु वर्ग के 1500 इंटरनेट यूजर्स के बीच किया गया था।



Source link

Share your feedback here