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Lakshmi Ji : लक्ष्मी जी पूजा का आज बना है अत्यंत शुभ योग

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Lakshmi Ji : पंचांग के अनुसार आज यानि 28 जनवरी 2022, शुक्रवार को माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है. शास्त्रों में इस एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी भी कहा जाता है. शुक्रवार के दिन एकादशी की तिथि पड़ने के कारण इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ वैभव की देवी लक्ष्मी जी का आशीर्वाद पाने का शुभ संयोग बना हुआ है.

शुक्रवार को ग्रहों की स्थिति
पंचांग के अनुसार 28 जनवरी 2022 को चंद्रमा का गोचर वृश्चिक राशि में हो रहा है. इस दिन ध्रुव योग का निर्माण हो रहा हे और ज्येष्ठा नक्षत्र है. इस दिन वृषभ राशि में राहु,वृश्चिक राशि में केतु और चंद्रमा, धनु राशि में मंगल और शुक्र ग्रह गोचर कर रहे हैं. इसके साथ ही मकर राशि में तीन ग्रहों की युति बनी हुई है. यहां पर ग्रहों के राजा सूर्य, कर्मफलदाता शनि देव और ग्रहों के राजकुमार बुध एक साथ बैठे हुए हैं. वहीं  देव गुरु बृहस्पति कुंभ राशि में भ्रमण कर रहे हैं.

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लक्ष्मी जी की पूजा
शुक्रवार के दिन लक्ष्मी जी की विशेष पूजा का विधान है. माना जाता है कि इस दिन विधि पूर्वक लक्ष्मी पूजन से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी जी को नियम और अनुशासन अधिक प्रिय हैं. इसलिए लक्ष्मी पूजन से जुड़ी चीजों में नियमों को विशेष ध्यान जाना चाहिए.  शुक्रवार शाम के समय घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि शुक्रवार के दिन दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती हैं. घर के सभी सदस्यों पर लक्ष्मी जी का आशीर्वाद बना रहता है. 

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शुक्रवार को ऐसे जलाएं ‘दीपक’
ऋगवेद के अनुसार दीपक में देवताओं का वास माना गया है. इसीलिए पूजन से पहले दीपक जलाने की परंपरा है. इसके साथ ही किसी भी शुभ कार्य को करने से पूर्व दीप को प्रज्वलित करते हैं. शास्त्रों के अनुसार दीपक को सदैव भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने ही प्रज्वलित करना चाहिए. घी का दीपक अपने बाएं हाथ की तरफ रखकर जलाएं और तेल का दीपक हमेशा दाईं ओर रखकर जलाना चाहिए. 

दीपक की बाती- दीपक की बाती का भी विशेष महत्व है. घी की बाती जला रहे हैं तो दीपक में रुई की बाती का प्रयोग करना उत्तम माना गया है, वहीं जब तेल का दीपक जलाते हैं तो लाल धागे की बाती बनाना चाहिए. दीपक जलाने के बाद उसकी दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए. कई बार इस बात का लोग ध्यान नहीं रखते हैं जिस कारण नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है. दीपक को कभी कोनों में नहीं रखना चाहिए. दीपक को सदैव पश्चिम दिशा में न रखना चाहिए. पूजा में खंडित दीपक का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

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लक्ष्मी जी की आरती (Lakshmi Ki Aarti)
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत हरि विष्णु विधाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जगमाता।
सूर्य, चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
तुम पाताल निवासनी, तुम ही शुभ दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्तु न कोई पाता।
खान पान का वैभव सब तुमसे आता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
शुभ्र गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
महालक्ष्मी जी की आरती जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।
लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।

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